शादी शुदा जिंदगी में अगर सच्ची खुशिया चाहिए हो तो

दोस्तों सभी रिश्तो में बराबरी का एहसास तभी होता हे जब आप अपने लाइफ पार्टनर को बराबर का रिस्पेक्ट देते हो। आप खुद से ज्यादा अपने लाइफ पार्टनर के बारे में सोचते हो। एक दूसरे का सुख दुःख समझकर आगे बढ़ना ही जिंदगी हे। शादी में कभी जभी एक इंसान अपनी इच्छा और जरूरतों को छोड़ देता हे और दूसरा हावी हहोता रहता हे।

लिव इन रिलेशनशिप

लिव इन रिलेशनशिप

दोस्तों जमाना २०२० का हे ,आजकल नयी जनेरेशन लिव इन रिलेशनशिप जैसे रिश्ते को ज्यादा अपनाना पसंद कर रही है.बिना शादी के बिना शादी की जिम्मेदारी के पतिपत्नी जैसे रहते हे। जब मन भर जाये तो अपने अपने रस्ते अलग अलग कर सकते हे। ऐसे रिश्तो में किसी को किसी से शिकायत नहीं होती,और न ही कोई किसी पर जबरदस्ती दबाव बना सकता हे ,आने वाले समय में लोग शादी और तलाक जैसे झंझटो में उलझने की बजाय लिव इन रिलेशनशिप बनाकर रेहना पसंद करेंगे। दोस्तों ये लिव इन रिलेशनशिप में लोग बस शारीरिक सुख के आलावा कोई जिम्मेदारी लेना पसंद नहीं करते। पर दोस्तों में यहाँ एक बात कहना चाहूंगा जब तक जवानी हे तब तक ये खेल ठीक हे पर उम्र जैसे आगे बढ़ती जाएगी लोग आप से दूर होते जायेंगे तब इस अकेले दिल को किसी अपने की बहोत ज्यादा जरुरत पड़ेगी। जब अपने आस पास आप हसती खेलती कोई फॅमिली देखेंगे तो उस टाइम आपको १००% ये फील होगा की लाइफ के इस मोड़ पर आप अकेले क्यों हुए.

ब्रेकअप के कारण

१) चरित्र (Character ):-

दोस्तों आप नयी बाते नया व्यवहार तो सिख सकते हे ,लेकिन चरित्र को नहीं सिख सकते। व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से होती है उसको पहचान ने के लिए हमे जानना होगा की वह कोण हे , क्या हे तभी उसके चरित्र की पहचान किए जा सकती हे , अगर आप के रिश्ते में कोई बात हो भी जाती है और आप उसको ज्यादा बढ़ाने की जगह समजोता कर लेते हे तो  भी आपके रिश्ते की उम्र बढ़ जाती है आपका रिश्ता अच्छा  बना रहता हे।

२) बच्चे (kids ):-

बच्चा हमारे जिंदगी का बहोत बड़ा हिस्सा होता हे। जो हमारे शादी शुदा लाइफ में बहोत खुशियों के पल देता है। बच्चे की एक मुस्कान ही हमारी जिंदगी में सुकून देती रहती है। अगर आप किसी व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में हो और वह बच्चा नहीं चाहता ,या चाहती तो जोर जबरदस्ती से विवश करना गलत होगा बच्चे पैदा करने क लिए दोनों की सहमति होनी चाहिए तभी कोई रिश्ता लम्बा सफर तय कर सकता है।

३) विवाह प्रथा ( Monogamy)

विवाह करने के लिए दोनों के विचार मिलना बहुत जरुरी हे। जिस में दोनों की सहमति हो. तभी रिश्ता बना रहता है नहीं तो रिश्ते में बस विवाद ही विवाद और क्लेश होंगे किसी भी बात या पॉइंट पैर समजोता करने के लिए दोनों की एक ही  सहमति होनी चाहिए।

४) शादी ( Marriage)

अगर शादी आपके लिए जरुरी रिश्ता हे तो आपको उस रिश्ते को सच्चे दिल से निभाना चाहिए। शादी के रिश्ते में बंधन तो होते ही हे दोस्तों पर हम उस बंधन को बेड़िया समज के क्यू लेते हे पता नहीं। जिम्मेदारी दोनों तरफ ५०-५०% होनी ही चाहिए। दोस्तों शादी एक गाड़ी के ४ पाइयो जैसी होती है एक भी पाइया खराब हुए तो बाकि ३ पे लोड तो  आता ही है। शादी में बन्धन में बांधते वक़्त ही आपको आनेवाली ५०-५० जिम्मेदारी के लिए तैयार रहना चाहिए ताकि शादी के कुछ साल के बाद झगड़े की नौबत न आये रिश्ते में। शादी के रिश्ते में कोई बड़ा छोटा नहीं होता दोस्तों। पति पत्नी अगर एक दूसरे की जिम्मेदारियां आपस आपस में समज जाये तो ये रिश्ता बहोत प्यार से आगे बढ़ता रहता है। एक दूसरे का आदर करना बहोत जरुरी हे शादी में दोस्तों।

जो अपनी नैतिकता और मुल्ल्यो के साथ समजोता करता हे वह सही जीवन साथी नहीं हो सकता ,जब तक आपको उस व्यक्ति पर विश्वास न बने , रिश्तो को सहमति की मोहोर न लगाए दोस्तों।

शादी का बंधन

दोस्तों २०२० का जमाना आया है। जैसे लोगो के रेहेनसेन में बड़ा बदलाव आया है वही लोगो के विचार भी बदल गए है खुले हो गए है। शादी दो लोगो के जीवन एक कर देती है एक पवित्र रिश्ता विश्वास का प्रतिक हे। शादी २ लोगो की जिंदगी सामाजिक ,भावनात्मक ,आर्थिक ,धार्मिक से जुड़ जाती है.आज दोस्तों जमाना बदल गया है लोगो के विचार रहसेहेन में बड़ा बदलाव आया हे। अब लोग अपने विचार खुलकर बोलने लगे है। जिंदगी लोग अपनी शर्तो पे जीने लगे है
आजकल के लड़की लड़के शादी नाम के संस्ता से सहमत थोड़े काम होते है।

पहले शादी का अर्थ किसी भी हल में अपनी एक ही पत्नी होता था बस एक के साथ ही सहजीवन रिश्ता निभाने का अर्थ शादी होता था। लेकिन आजकल की शादी में बहोत उतर चढ़ाव देखने मिलते है ,आजकल नयी जनेरेशन शादी को उम्र भर का बंधन नहीं बनाना चाहती, कही बार तो लाइफ अपनी शर्तो पे जीने की आजादी के लिए ये नई जनेरेशन शादी के बंधन से दूर रहना ही पसंद करते है। लिव इन रिलेशनशिप ऐसी बात की गवाही देता है की हम अपनी शारीरिक जरूरत तो पूरी करना चाहते है लेकिन शादी कर के किसी के साथ उम्र भर बंधन में बंदना नहीं चाहते , यही वजह है की आजकल ऐसे नए रिश्तो की शुरुवात हो चुकी है। लेकिन ऐसी रिश्तो को समाज ने कभी उचित नहीं माना हे।

जहा तक शादी का सवाल है तो ऐसे लोगो की कमी नहीं जो थोड़े टाइम क लिए शादी के समझोते कर लेते है ,तो फ्रेंड्स ऐसे लोगो की जरुरत के हिसाब से समाज में ऐसी शादियों के चलन बाद रहे है। में आपको डिटेल में समजता हु पॉइंट तो पॉइंट निचे

१) कैटेरक्चुअल मैरिज 🙁 यह शादी एक समय सिमा पर समाप्त होने वाले कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित होती है )

२) क्वाटनरी मैरिज :- ( इस में २ शादी शुदा कपल और उन के बच्चे साथ साथ रहते है )

३) प्रीमिसिव मैरिज :- ( इन शादी में एक्स्ट्रा मेरीटीएल रिलेशनशिप रखने की आज़ादी होती है )

दोस्तों आज समाज में जिस तरह की शादिया होती है उन में एक सराहनिए बात यह होती है की पतिपत्नी एकसाथ जीवन शुरू करते है और अपनी आगे की पीढ़ी की देखरेख खुद करते है। फ्रेंड्स फ्यूचर में ऐसी ऐसी शादीयो में और ज्यादा विकास हो सकता है। शादी पूरी तरह से एक व्यक्तिगत विचार होता है ऐसे व्यक्ति के पास ज्यादा विकल्प होंगे।

ओपन मैरिज :-

वस तरह की शादी में दोनों पार्टनर आपस में प्रेम करते है और साथसाथ रहना पसंद करते है। लेकिन उन की तरफ से एक दूसरे को यह फ्रीडम रहती है की वे किसी और के साथ भी शारीरिक रिश्ता बना सकते है यही नहीं वे अपने रिश्ते एक से अधिक के साथ भी बनाने के लिए स्वतंत्र रहते है। और एक बात यह है की यदि एड्स या गर्भवती न होने की गार्रेंटी रहेगी तो यह रिश्तो के खेल चलते रहते है लम्बे समय तक।

टेम्पेररी मैरिज :-

ये ऐसा एक नाम है जिसे सुनकर आपको पता चल ही गया होगा की यहाँ शादी कुछ समय सिमा के लिए है किए जाती है। कुछ सालो कुछ महीने के कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर किए जाती है। अगर दोनों पार्टनर एक दूसरे के साथ खुश हे तो यह शादी अधिक समय के लिए बानी रहती है। यूरोपियन देशो में तो कही पार्टनर के साथ शादी और तलाक हो जाता है। अगर में आपको लीगल वे में बाताऊ तो जिस डेट पे कॉन्ट्रैक्ट ख़तम हो रहा है उसी दिन शादी के कॉन्ट्रैक्ट को रेन्यू किया जा सकता है। अगर अपने ऐसा नहीं लिया तो आपका शादी कॉन्ट्रैक्ट ख़तम होजाता है। दोस्तों आपको पता है आजकल नए ज़माने में लोग एक दूसरे की देश में जाकर जॉब्स कर रहे है और ये आगे और बढ़ेगा तब टेम्पेरेरी शादी का चलन भी और बढ़ेगा।

ट्रायल मैरिज :-

यूरोप के हिस्ट्री में किसान अपने बच्चो को इस बात की आज़ादी देते थे की वे अपना मनपसंद पार्टनर पाने के लिए शादी से पहले किसी के साथ शारीरिक रिश्ता बनाने का अनुभव प्राप्त करे। उन माता पिता ऐसे एक गंभीर मामला मानते थे इस तरह की शादियों के पीछे यही रीज़न होता था की यही रिश्ता ठीक से न चला तो तलाक के झंझंटो से बचा जा सके और एकदूसरे से आसानी से दूर हुआ जा सके। एक ट्रायल मैरिज टेम्पेरेरी मैरिज की तरह ही होती है। आज भी समाज में युवा एक प्राइवेट इनफॉर्मल एग्रीमेंट कर के आपस में साथ साथ रहते है ,और इस के बाद जब एकदूसरे को अछि तरह समाज लेते है तब शादी कर लेते है।

इंडिविजुअल मैरिज :-

इस शादी में २ पार्टनर तब एक साथ रहते है जब तक वे चाहते है। लेकिन उन्हें बच्चे पैदा करने का अधिकार नहीं होता। इस के बाद जब पतिपत्नी बच्चो की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार होजाते है तो पैरेंटल मैरिज होती है।